Name Of Post : सीईटी भी दो चरणों में, प्री व मेन एग्जाम संभव, न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% हो सकते हैं — पूरा विवरण
सीईटी भी दो चरणों में, प्री व मेन एग्जाम संभव, न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% हो सकते हैं — पूरा विवरण
सीईटी भी दो चरणों में, प्री व मेन एग्जाम संभव, न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% हो सकते हैं — पूरा विवरण
सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) में बड़े बदलाव किए जाने की तैयारी है। नए प्रस्तावों के अनुसार सीईटी को भी दो चरणों — प्री (Preliminary) और मेन (Main) परीक्षा में आयोजित किया जा सकता है। इसके साथ ही न्यूनतम उत्तीर्णांक (Passing Marks) 60% तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
क्या है सीईटी (CET)?
सीईटी यानी कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट एक ऐसी परीक्षा है, जिसके आधार पर विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों और आयोगों की भर्तियों में अभ्यर्थियों की पात्रता तय की जाती है। इसका उद्देश्य बार-बार अलग-अलग परीक्षाओं की जगह एक साझा पात्रता परीक्षा के माध्यम से योग्य उम्मीदवारों को छांटना है।
दो चरणों में हो सकती है परीक्षा
प्रस्तावित नए सिस्टम के अनुसार:
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प्री परीक्षा (Pre CET):
यह एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग परीक्षा होगी, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसमें सामान्य अध्ययन, तर्कशक्ति, गणित, भाषा और बेसिक जनरल नॉलेज जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। -
मेन परीक्षा (Main CET):
प्री परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मेन परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा। मेन परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कठिन होगा और इसमें विषयवार/पोस्ट-विशेष प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि केवल योग्य और गंभीर उम्मीदवार ही अंतिम चयन प्रक्रिया तक पहुंचें।
न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% तय होने की संभावना
नए नियमों में यह भी प्रस्ताव है कि सीईटी में न्यूनतम 60% अंक लाना अनिवार्य किया जा सकता है।
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इससे परीक्षा का स्तर बेहतर होगा
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मेरिट आधारित चयन को बढ़ावा मिलेगा
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केवल न्यूनतम योग्यता वाले उम्मीदवार ही आगे की भर्ती परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे
हालांकि आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC/EWS) के लिए सरकारी नियमों के अनुसार छूट दी जा सकती है।
क्यों किया जा रहा है यह बदलाव?
सरकार और भर्ती एजेंसियों का मानना है कि:
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वर्तमान व्यवस्था में अभ्यर्थियों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है
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कई उम्मीदवार बिना पर्याप्त तैयारी के भी आवेदन कर देते हैं
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चयन प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है
दो चरणों वाली सीईटी और 60% पासिंग मार्क्स से:
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प्रतियोगिता स्वस्थ होगी
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योग्य उम्मीदवारों की पहचान आसान होगी
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समय और संसाधनों की बचत होगी
उम्मीदवारों पर क्या पड़ेगा असर?
फायदे:
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मेहनती और गंभीर अभ्यर्थियों को लाभ
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बार-बार अलग-अलग परीक्षाओं की जरूरत कम
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मेरिट को प्राथमिकता
चुनौतियां:
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तैयारी का स्तर और बढ़ेगा
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औसत तैयारी वाले उम्मीदवारों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन
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शुरुआत में बदलाव को समझने में समय लग सकता है
कब से लागू हो सकते हैं नए नियम?
फिलहाल ये नियम प्रस्तावित/संभावित हैं। अंतिम फैसला संबंधित सरकार, भर्ती बोर्ड या आयोग द्वारा आधिकारिक अधिसूचना के जरिए किया जाएगा। माना जा रहा है कि 2026 से लागू होने वाली भर्तियों में इन नियमों को लागू किया जा सकता है।
निष्कर्ष
यदि सीईटी को दो चरणों में आयोजित किया जाता है और न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% तय होता है, तो यह सरकारी भर्तियों में एक बड़ा और निर्णायक सुधार साबित हो सकता है। इससे न केवल परीक्षा प्रणाली मजबूत होगी, बल्कि योग्य उम्मीदवारों को भी बेहतर अवसर मिलेंगे। अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे अभी से गंभीर और योजनाबद्ध तैयारी शुरू करें और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।
